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अवनीश के काव्य संग्रह ‘धार का पेड़’ में दिखी कविता की धार

वरिष्ठ शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ. अवनीश उनियाल की काव्य कृति 'धार का पेड़' का लोकार्पण, दाद साहित्य एकांश के तत्वावधान में दून लाइब्रेरी में हुआ कार्यक्रम 

देहरादून: दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में धाद साहित्य एकांश के तत्वावधान में वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. अवनीश उनियाल की काव्य कृति ‘धार का पेड़’ का भव्य लोकार्पण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनियाल की कविताएं जहां समाज की तमाम विसंगतियों पर बात करती हैं, वहीं आनंद की अनुभूति भी कराती हैं। वक्ताओं ने डॉ. अवनीश उनियाल की काव्य-दृष्टि, संवेदनशील अभिव्यक्ति तथा पहाड़, प्रकृति और लोकजीवन से जुड़े सरोकारों की मुक्त कंठ से सराहना की।

कार्यक्रम का शुभारंभ लोक गायिका पूनम नैथानी द्वारा प्रकृति वंदना से हुआ। धाद साहित्य एकांश की संयोजक कल्पना बहुगुणा ने संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि एकांश साहित्यिक सृजन, पुस्तक चर्चा एवं लोकार्पण जैसे आयोजनों के माध्यम से साहित्यिक चेतना को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है।

मुख्य अतिथि अनिल रतूड़ी ने कहा कि यह संग्रह कविताओं और ग़ज़लों का ऐसा संकलन है, जिसमें लेखक ने अपनी भावनाओं, विचारों और अनुभवों को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि रचनाओं में सार्वभौमिक मानवीय संवेदनाओं के साथ-साथ पहाड़ की जीवन-दृष्टि और संवेदना भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अति विशिष्ट अतिथि राधा रतूड़ी ने अपने संबोधन में कहा कि यह कविता संग्रह विविध भावों, मानवीय संवेदनाओं, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्वतीय परिवेश का सुंदर गुलदस्ता है। उन्होंने कहा कि लेखक ने सामाजिक विसंगतियों, अन्याय, भ्रष्टाचार और मानवीय मूल्यों पर हो रहे आघात के विरुद्ध अपनी लेखनी के माध्यम से प्रभावशाली हस्तक्षेप किया है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि यह संग्रह हिंदी कविता की नई पीढ़ी में मौलिकता और व्यवस्था-विरोधी चेतना के सशक्त स्वर का परिचायक है। उन्होंने पुस्तक को पठनीय और संग्रहणीय बताते हुए इसकी साहित्यिक परिपक्वता की सराहना की।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सुधारानी पांडे ने कहा कि साहित्य समाज, राष्ट्र और मानवता तक अपनी बात पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि संग्रह की कविताएं और ग़ज़लें अपने समय से संवाद करती हैं तथा भाषा, भाव और संवेदना के स्तर पर पाठकों से गहरा जुड़ाव स्थापित करने में सक्षम हैं।

इस अवसर पर सोमवारी लाल उनियाल, डॉली डबराल, दर्द गढ़वाली, गणेश उनियाल, डॉ. राकेश बलूनी, प्रदीप डबराल, मोहन चौहान, हर्षमणि भट्ट, शांति प्रकाश जिज्ञासु, नरेंद्र सिंह, रजनीश त्रिवेदी, सुनीत नैथानी, अरुण असफल, डॉ. आर.के. भट्ट, इकबाल आजर, दयानंद डोभाल, सुमित्रा जुगलान, नीलम प्रभा वर्मा, सुनीता चौहान, बीना बेंजवाल, सुदीप जुगरान, आशीष उनियाल, सत्य प्रकाश शर्मा, हेमचंद्र सकलानी, अरुण भट्ट, आशा डोभाल, सुरेंद्र सेमल्टी, सत्यानंद बडोनी, नीरज नैथानी, चंद्रशेखर तिवारी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की मुख्य संयोजक डॉ. विद्या सिंह ने सभी अतिथियों, साहित्यप्रेमियों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया। शायर शादाब मशहदी ने कार्यक्रम का प्रभावी संचालन किया।

 

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