उत्तराखंडधरना-प्रदर्शनस्वास्थ्य

विवादों में घिरा दून मेडिकल कॉलेज

प्राचार्य गीता जैन को क्यों जोड़ने पड़ रहे हाथ और कब रुकेंगे ये इस्तीफे.?

देहरादून: दून मेडिकल कॉलेज और अस्पताल इन दिनों लगातार विवादों और प्रशासनिक चुनौतियों के बीच घिरा नजर आ रहा है। एक ओर उपनल के माध्यम से कार्यरत सफाई कर्मचारियों ने मानदेय न मिलने पर काम का बहिष्कार कर दिया, तो दूसरी ओर संस्थान में इस्तीफों का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर प्राचार्य डॉ. गीता जैन को कर्मचारियों के सामने हाथ क्यों जोड़ने पड़ रहे हैं और मेडिकल कॉलेज में इस्तीफों का दौर कब थमेगा?

मंगलवार सुबह मानदेय भुगतान में देरी से नाराज सफाई कर्मचारियों ने ओपीडी की सफाई बंद कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी के बीच प्राचार्य डॉ. गीता जैन खुद मौके पर पहुंचीं और कर्मचारियों से बातचीत की। कर्मचारियों ने बताया कि हर महीने मानदेय के लिए इंतजार करना पड़ता है और जून समाप्त होने को है, लेकिन मई का भुगतान भी नहीं हुआ।

स्थिति उस समय भावुक हो गई जब डॉ. गीता जैन ने कर्मचारियों से कहा कि “आप मेरे छोटे बच्चे हैं, आपको हुई परेशानी के लिए मैं शर्मिंदा हूं।” यह सुनकर कर्मचारियों ने भी सम्मानपूर्वक जवाब दिया, “मैडम, हाथ न जोड़िए… बस इस व्यवस्था को ठीक करा दीजिए।” हालांकि उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो बुधवार से बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।

उधर, मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक अस्थिरता की तस्वीर भी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक पिछले दिनों सामने आए मेस और आयुष्मान फर्जीवड़े के बाद अफसरों और डॉक्टरों में अंदर खाने टकराव देखने को मिल रहा है। जिसके कारण राजनीतिक दलों की तरह यहां भी गुटबाजी बढ़ती जा रही है।

मेस फर्जीवाड़े के बाद मुख्य वार्डन बनाए गए डॉ. विवेकानंद सत्यवली पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। अब एंटी रैगिंग कमेटी के अध्यक्ष और बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ. अशोक कुमार ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले डिप्टी एमएस डॉ. एनएस बिष्ट भी पद छोड़ चुके हैं। इस्तीफों के पीछे विभागीय कार्यभार और प्रशासनिक दबाव जैसे कारण बताए जा रहे हैं।

लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन और एक के बाद एक इस्तीफों ने दून मेडिकल कॉलेज की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अस्पताल प्रशासन कर्मचारियों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाल पाएगा और संस्थान में चल रहा असंतोष कब खत्म होगा।

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